अंडर-17 विश्व कप: एक ऐतिहासिक पल का आज होगा आगाज

(By Rahul Pandey )
 
5 दिसंबर 2013, को जब फीफा अध्यक्ष सेप ब्लेटर ने अंडर-17 विश्व कप 2017, कि मेज़बानी भारत को सौंपी तो खेल जगत में खलबली मच गया । सभी की ज़ुबान पर एक ही सवाल था, भारत और फुटबॉल, भला ये कैसा मेल हुआ । फीफा की विश्व रेंकिंग मे हम शीर्ष 150 देशों की सूची में भी नहीं थे। घरेलू फुटबॉल लीग से भी खास परिणाम नहीं आ रहे थे, यहा तक की आइ-लीग को बन्द करने तक की अपील की जा रही थी । प्रदर्शन ही नहीं प्रसारण भी अहम मुद्दा था । भारतीय फुटबॉल टीम के मैच, लाइव तो दूर, प्राईम टाइम बुलेटिन में 10 सैकंड कि जगह भी नहीं बना पा रहे थे। फिर आखिर क्यों फीफा जैसी संस्था ने विश्व की 200 से अधिक देशों में भारत को ही बतौर मेज़बान चुना ।
 
भारत पिछले कई वर्षो से वैश्विक बाज़ार का केंद्र रहा हैं और बात जब फुटबॉल कि हो तो इसमे कोई शक नही कि इस खेल की भारतीय बाज़ार में जडे़ बहुत मजबूत हैं ।
 
हम भारतीय फुटबॉल से तो दूर रहे हैं , किन्तु फुटबॉल से नहीं । मैसी या रोनाल्डो में कौन बेहतर हैं, इस विषय पर अक्सर वाद विवाद होते हैं , किन्तु उन दोनो से बेहतर अंतरराष्ट्रीय गोल औसत, भारतीय कप्तान  सुनील छैत्री का हैं, ये हमारे लिए अविश्वसनीय तथ्य बन जाता । हम आधी रात जागकर ये जानने के लिए तैयार रहते हैं कि आखिर जर्मनी जीता या ब्राज़ील, किन्तु अपने ही देश में हो रहे भारत-पाकिस्तान फुटबॉल मैच में हमारे मैदानो में सन्नाटा पसर जाता हैं। 
132 करोड़ से अधिक आबादी वाले देश क्या 11 विश्वस्तरीय खिलाड़ीयो कि सेना नही गठित कर सकता था, ये विश्वास करना ज़रा मुश्किल था ।
 
आज़ादी के तीन साल बाद, हम एशिया की सर्वश्रेष्ठ टीम थे और 1950 विश्व कप में खेलने के लिए क्वालिफाइ भी कर चुकें थे, ,पर वित्तीय समस्याओ के कारण हम फुटबॉल के विश्व नक्शे पर काबिज नहीं हो पाए । 
 
लेकिन 5 दिसंबर 2013 से अब तक काफी कुछ बदल चुका हैं । 22 सालों में पहली बार प्रथम 100 विश्व रेंकिंग मे स्थान बनाना, आईएसएल (इंडियन सुपर लीग का आगमन) का आगमन, व तीन संस्करणो के भीतर ही विश्व की तीसरी सबसे ज्यादा लाइव अटेंडिड लीग बनना, और खुद अंडर-17 टीम का चिली, पुर्तगाल व इटली जैसी टीमों के खिलाफ यादगार प्रदर्शन ,यह सब महज़ एक संयोग नहीं था । 
 
 
 
और आखिरकार वो पल आ गया हैं जिसका हमारा देश मानों सदियों से इंतजार कर रहा था । यह विश्व कप केवल फुटबॉल कि ही नहीं, भारतीय खेल जगत के लिए एक बहुत बडी उप्लब्धी हैं ।
 
भारत महज़ एक देश नहीं, एक भारत में हजारों भारत बसते हैं । भिन्न भाषाए, धर्म, राज्य, संस्क्रति, राजनीति  और संस्थाओ से अलग, एक दायरा ऐसा हैं जहाँ सारे भारत एक हो जाते हैं, खेल । खेल कि दुनिया में तकदीर आपको एक मौका जरूर देती हैं, वर्तमान को जीतकर भविष्य के लिए एक सुनहरा इतिहास रचने का । और 67 साल बाद आज भारत के 11 युवाओं को यह मौका मिला हैं, विश्व कप में देश कि सरजमीं पर देश के लिए खेलने का । तो चलिए हम और आप मिलकर, कंधे से कंधा मिलाकर तकदीर के इस सफर में उनके साथ चलते हैं और स्वरणिम अक्षरो में अपना कल बनाते हैं । जय हिंद ।

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